अफसर बिजनेस पार्टनर बनाना बंद करें ठेकेदारों को अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा – गहलोत

रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जोधपुर/जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री पूरी तरह से चुनावी में मूंढ में आ गए हैं। जिस तरह अशोक गहलोत ने जोधपुर में अफसरों को लताड़ लगाई, शायद अब से पहले इस प्रकार से अफसरों को लताड़ नहीं लगाई होगी।
जोधपुर में अशोक गहलोत ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर पीडब्ल्यूडी के अफसर और इंजीनियर्स को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि आजकल कई एक्सईएन तो ठेकेदार के पार्टनर बन जाते हैं। ठेकेदार फिर क्वालिटी से समझौता करता है और बिजनेस पार्टनर से रिश्ते भी निभाता है। इस कारण से सड़कों की क्वालिटी इतनी खराब बन जाती है कि छह महीने में ही टूट जाती हैं। समय के साथ बहुत बदलाव आया है, करप्शन बहुत बढ़ गया है। यह शब्द गहलोत ने बड़े दुखी मन से मीडिया के सामने बताई।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत


काबिले गौर है कि गुरुवार को प्रदेश में 3324 करोड़ की लागत से बनी 113 सड़कों का शिलान्यास व लोकार्पण का आयोजन था। इसी दरम्यान गहलोत ने प्रदेश की खराब सड़कों और क्वालिटी को लेकर अफसरों की बेजा क्लास ली। इस लाइव समारोह में गहलोत ने कहा कि सब कुछ मंजूर है, लेकिन सड़कों की क्वालिटी से समझौता मंजूर नहीं होगा। अब भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि हम सड़कों को बनाने के बाद थर्ड पार्टी जांच भी करवा रहे हैं। सड़कों की क्वालिटी चीफ इंजीनियर पर निर्भर है। आपके यहां आजादी के बाद से जो सिस्टम बना हुआ है, वह सिस्टम है। आप ठेकेदारों को दो टूक कह दीजिए कि क्वालिटी से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।
गहलोत ने साफ शब्दों में कहा कि – मैं दो टूक कहना चाहता हूं कि मैं नीचे वालों को जिम्मेदार नहीं मानूंगा, जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर की है। जो गड़बड़ी करते हैं उन्हें आप एपीओ करें, खिंचाई करें , कुछ भी करें, लेकिन सड़कों की क्वालिटी से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।


जोधपुर की खराब सड़कों का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में दोबारा जोधपुर की खराब सड़कों का जिक्र करते हुए कहा- मैं कल ही जोधपुर जाकर आया हूं। जोधपुर की पूरी सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। मुझे कहना पड़ा कि जिन अधिकारियों काे यहां रहना है, उन्हें सड़कें ठीक करनी होगी, रिपेयर करनी होगी। यह बात खाली जोधपुर की नहीं है, यह हालात सब शहरों के बने हुए हैं, गांवों के बने हुए हैं। जो जिस पद पर बैठा है, वह ईमानदारी से ड्यूटी निभा ले तो जनता की तकलीफ दूर हो जाएगी। इस बात को अच्छी तरह समझ ले।


अफसरों की लापरवाही से ही खराब होती है सड़कें


संबोधन में गहलोत ने कहा कि ठेकेदार जब टेंडर लेता है तो उस सड़क की मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उसकी होती है, एग्रीमेंट कर लिया, पाबंद कर दिया, बाद में आप उसे देखते ही नहीं हैं। ठेकेदार जानबूझकर उस सड़क को रिपेयर नहीं करता है और जनता तकलीफ पाती है। जनता में मैसेज गलत जाता है। हमारी लापरवाही से जनता तकलीफ पाती है। ठेकेदार को पाबंद किया हुआ है और टेंडर एग्रीमेंट में होता है कि सड़क की रिपेयर की जिम्मेदारी ठेकेदार की है, फिर मॉनिटरिंग का काम कौन करेगा। इसलिए अफसर अपने दिल से पूछकर काम करें कि वे पोस्ट पर बैठे हैं तो जनता की तकलीफ का ध्यान रखें।


गुजरात की सड़कों पर बोले: नींद खुल जाए तो समझो गुजरात आ गया


सीएम ने कहा कि राजस्थान में पिछले 20 साल में सड़कों में अच्छा काम हुआ है। राजस्थान की सड़कें अब गुजरात से अच्छी हो गई हैं। पहले कहा जाता था कि आप गुजरात से आ रहे हैं और झटकों से नींद खुल जाए तो समझो कि राजस्थान आ गया। अब गुजरात के लोग उसके उल्टी बात कहने लग गए हैं। अब लोग कहते हैं राजस्थान से यात्रा करते वक्त झटकों से नींद खुल जाए तो समझो गुजरात आ गया।
उन्होंने कहा कि सड़कें सरकार की टॉप प्रायोरिटी है। सड़कों के मामले में राजस्थान अव्वल बने, यह सरकार चाहती है। जब सड़कें अच्छी होंगी तो ही प्रदेश में निवेश आएगा, विकास होगा। अक्टूबर में जो इन्वेस्टमेंट समिट हो रहा है, उसके लिए 11 लाख करोड़ के एमओयू अब तक हो चुके हैं। राजस्थान में लॉ एंड ऑर्डर तुलनात्मक रूप से अच्छा है। विपक्ष हमेशा बेतुकी बयान देते रहते हैं।

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