नियम का अड़ंगा लगाकर कर्मचारी चयन बोर्ड बेरोजगारों से छीनी 2793 नौकरियां

रविप्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो चीफ
जयपुर। राजस्थान में 35 लाख से ज्यादा ग्रेजुएट बेरोजगार हैं, एक-एक सरकारी पोस्ट के लिए लाखों आवेदन करते हैं। यहां किसी सरकारी भर्ती परीक्षा में पोस्ट खाली रहने की बात लाखों युवाओं के गले नहीं उतर रही। ये हुआ है कंप्यूटर अनुदेशक सीधी भर्ती परीक्षा-2022 में। अब लग गया अब लग गया नियम का अड़ंगा, इसलिए बेरोजगारों के साथ अन्याय हो गया।

जिस तरह कम्प्यूटर शिक्षा में डिग्रियां मिल रही हैं, वो बहुत चिंताजनक है। जिन छात्रों को PGDCA और डिग्रियां घर बैठे यूं ही मिल जाती हैं, स्कूल कॉलेज जाने की जरूरत तक नहीं है। ऐसे छात्रों को नॉलेज नहीं होती। ढंग का पेपर आने पर पोल खुल जाती है।

हरिप्रसाद शर्मा चेयरमैन, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड


गौरतलब है कि प्रदेशभर में 18 जून को 9862 पदो पर भर्ती हुई थी। परीक्षा में सिर्फ 7069 कैंडिडेट ही बोर्ड ने एलिजिबल घोषित किए हैं। कुल 2793 पोस्ट खाली रह गई हैं। वजह है कैंडिडेट मिनिमम पासिंग मार्क्स ही नहीं ला सके। करीब 2 लाख कैंडिडेट्स ने ये परीक्षा दी थी।
कर्मचारी चयन बोर्ड इस बात को माने या ना माने परंतु हकीकत यह है कि 2793 पोस्ट खाली नहीं रही बल्कि ये नौकरियां बोर्ड की एक गलती ने छीनी हैं। इसमें सबसे बड़ा रोल अदा किया बोर्ड के लेट लतीफ के कारण बेरोजगारों के साथ अन्याय हुआ। एग्जाम होने के 12 दिन बाद निकाला गया।
इसका असर ये हुआ कि हार्ड पेपर में निगेटिव मार्किंग के डर से कैंडिडेट पूरा एग्जाम अटेम्प्ट नहीं कर पाए। आखिर भर्ती परीक्षा में बोर्ड ने एग्जाम कराने के 12 दिन बाद नई शर्त क्यों जोड़ी, इसका जिम्मेदार कौन है?
प्रदेश में ऐसी भर्ती परीक्षा पहली बार हुई थी। इस परीक्षा में दोनों पेपर (बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक और सीनियर कंप्यूटर अनुदेशक) में 40-40 परसेंट मिनिमम पासिंग मार्क्स लाने थे। बोर्ड के मुताबिक कैंडिडेट वह भी नहीं ला सके। जो कैंडिडेट पास हुए है, इनकी भी पात्रता और डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही नौकरी लग सकेगी।

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