साढ़े चार करोड़ में से 19 लाख लोगों को मिलेगा राशन के गेहूं, बाकी रहे लोगों का कोई धणी-धोरी नहीं

मीनेश चंद्र मीणा 

 हैलो सरकार न्यूज़ ब्यूरो चीफ

 जयपुर। राजस्थान प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत नए नाम जोड़ने के लिए राज्य सरकार अब एक नई कैटेगरी बनाएगी। जिसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जिन्हें कोरोना में सरकार से आर्थिक मदद मिली है। हालांकि इसका निर्णय सीएम स्तर पर होगा। राज्य सरकार ने बजट में 10 लाख नए लोगों को योजना में जोड़कर गेहूं देने की घोषणा की थी, लेकिन जब आवेदन का पोर्टल खोला गया तो 19.57 लाख लोगों ने आवेदन कर दिया।

राशन की उचित मूल्य की दुकान

सूत्रों के अनुसार मिली जानकारी से अभी केंद्र सरकार द्वारा तय सीमा के अनुसार राज्य सरकार 15 लाख लोगों को ही जोड़ सकती है। ऐसे में अब करीब 5 लाख लोगों के लिए नई कैटेगरी बनाई जाएगी। वहीं जानकारी के अनुसार इसका खर्चा भी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

वास्तविकता यह है कि आवेदन करने वालों लोगों में गरीब, असहाय और अनपढ़ व्यक्ति आवेदन की प्रक्रिया से काफी दूर रह गए।

खास बात यह रही कि नए नाम जुड़वाने के लिए 32 कैटेगरी में 19,57, 993 आवेदन आए थे। यानी आवेदन डबल के करीब हैं। पोर्टल बंद हुए 3 महीने हो चुके हैं पर अभी तक फाइनल निर्णय नहीं होने की वजह से आवेदनों की स्क्रूटनी भी नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार फाइनेंस विभाग को इसकी फाइल भेजी गई थी, जो वापस आ गई है। फिलहाल राजस्थान में 4.46 करोड लोगों को गेहूं दिये जाने की लिमिट है, जिसमें से करीब 4.26 करोड़ को गेहूं दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि 64 लाख लोग खाद्य सुरक्षा योजना से बाहर भी हो चुके हैं। सरकार खाद्य सुरक्षा योजना में नए लोगों को जोड़ने की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ अब तक प्रदेश के 64 लाख लोग खाद्य सुरक्षा योजना से बाहर हो गए हैं। अब तक करीब 83 हजार सरकारी कर्मचारी भी हटाए गए हैं। स्वेच्छा से नाम हटवाने वाले भी 1.97 लाख लोग हैं। जानकारी के अनुसार इसमें चौपहिया वाहन रखने वाले लोगों की भी जांच की जा सकती है। यह नया फंडा और लागू हो गया।

वास्तविकता यह है कि आवेदन करने वालों लोगों में गरीब, असहाय और अनपढ़ व्यक्ति आवेदन की प्रक्रिया से काफी दूर रह गए।

राजस्थान प्रदेश के जयपुर सहित 4 जिलों में 1 लाख से ज्यादा आवेदन खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए 32 श्रेणियां निर्धारित थी। आवेदन करने वाले 85 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा फॉर्म लघु कृषक कैटेगरी से आए हैं। शहरी क्षेत्र में बात करें तो श्रमिक सबसे ज्यादा हैं। अजमेर में 65184, अलवर में 86979, बांसवाड़ा में 40723, बारां में 28276, बाड़मेर में 112572, भरतपुर में 85294, भीलवाड़ा में 84148, बीकानेर में 75026, बूंदी में 41842 नाम आए हैं। वास्तविकता यह है कि आवेदन करने वालों लोगों में गरीब, असहाय और अनपढ़ व्यक्ति आवेदन की प्रक्रिया से काफी दूर रह गए।

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