एसीबी के नए मुखिया का आदेश, अब भ्रष्टाचारियों का नाम व चेहरा नहीं होगा उजागर

रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। भ्रष्टाचारियों के नाम व चेहरा और पते की जानकारी हर आदमी को देखने की बड़ी लालसा होती थी। लेकिन अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के नए महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने आदेश जारी कर भ्रष्टाचारियों के नाम व चेहरा सार्वजनिक करने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के नए महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी


गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो बुधवार को आदेश जारी कर बताया कि अब भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों को ट्रैप करने के बाद नाम और फोटो जारी नहीं करेगी। सिर्फ विभाग का नाम और पद की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
आदेश में बाकायदा मानव अधिकारों के हवाला देते हुए भ्रष्ट कर्मचारी एवं अधिकारी का तब तक नाम उजागर नहीं किया जाएगा जब तक वह न्यायलय से दोष सिद्ध नहीं हो जाता। तब तक भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारी की सुरक्षा करने का दायित्व अन्वेषण अधिकारी का होगा।
आदेश की इस बात का साफ उल्लेख है कि जब तक आरोपी पर अपराध सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसकी फोटो और नाम मीडिया में या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा। साथ ही, जिस भी आरोपी को पकड़ा जाएगा, उसकी सुरक्षा और मानवाधिकार की जिम्मेदारी ट्रैप करने वाले अधिकारी की रहेगी।

पुलिस थाने में किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर उनका नाम और पता तथा फोटो समाचार पत्र एवं मीडिया में प्रकाशित किया जाता है, तब क्या मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है? इस यक्ष प्रश्न का जवाब संभवतः एसीबी के नया मुखिया हेमंत प्रियदर्शी ही दे सकते हैं


काबिले गौर है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब से पहले पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी के साथ वीडियोग्राफी कराती है। बाकायदा फुटेज और फोटो मीडिया को जारी भी करती थी। इसका मकसद यह होता था कि जिसे पकड़ा गया है, उसके कारनामें से अधिक से अधिक लोक वाकिफ हो सकें। फोटो-वीडियो सामने आने के बाद एसीबी के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ता था। धीरे-धीरे समय बदला और एसीबी के अधिकारियों ने कार्रवाई के बाद मौके पर मीडिया को बुलाना शुरू कर दिया। पूरी कार्रवाई मीडिया को दिखाई जाती थी, ताकि पूरी डिटेल के साथ रिपोर्ट आम लोगों के सामने आ सके।
इतना ही नहीं, सर्च तक की फोटो-वीडियो जारी होती थी। आरोपियों के घर-ऑफिस पर चल रहे सर्च तक की फोटो-वीडियो एसीबी जारी करती थी। अब नए आदेश को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल उठने लगा है कि अभी तक जो हो रहा था, वह गलत हो रहा था। आरोपियों की फोटो और नाम छुपाकर एसीबी क्या करना चाहती है। इसको लेकर कोई साफ जवाब नहीं मिल पा रहा है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की नए मुखिया के आदेश पर सवालिया निशान पैदा होता है कि पुलिस थाने में किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर उनका नाम और पता तथा फोटो समाचार पत्र एवं मीडिया में प्रकाशित किया जाता है, तब क्या मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है? इस यक्ष प्रश्न का जवाब संभवतः एसीबी के नया मुखिया हेमंत प्रियदर्शी ही दे सकते हैं।

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