बस्सी के उप जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते अस्पताल के हाल बेहाल

ओम प्रकाश शर्मा
हैलो सरकार निजी संवाददाता


बस्सी। क्षेत्र की जनता का दर्द बस्सी की जनता की जुंबानी, क्षेत्र की जनता का कहना है कि बस्सी में वर्तमान जनप्रतिनिधि ने लगभग अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। पूर्व जनप्रतिनिधि से निराश लोगों को वर्तमान जनप्रतिनिधि से बहुत उम्मीदें थी। लेकिन वर्तमान जनप्रतिनिधि संपूर्ण क्षेत्र के विकास के दावों के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र का उप जिला अस्पताल भी वर्तमान में वेंटिलेटर पर पड़ा है। क्षेत्र में डेंगू बहुत तेजी से दस्तक दे चुका है और अस्पताल प्रबंधन बेबस और लाचार दिखाई दे रहा है। अस्पताल में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीजों ने जब अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं जब बारीकी से देखी तो बताया कि अस्पताल की कभी सीबीसी मशीन खराब रहती है, तो कभी सोनोग्राफी मशीन। जिसके कारण पहले से गरीबी से जूझ रहे बेबस और लाचार मरीजों को मनमाने दाम देकर अस्पताल के बाहर निजी जांच केंद्रों पर जांच करवानी पड़ती है। मरीजों को अधिकतर यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है कि अभी मशीन खराब है। बाहर बाजार में निजी मेडिकलों पर 5 से 7 रुपए में आसानी से उपलब्ध होने वाला टिटनेस का इंजेक्शन 20 दिन तक उप जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं होता हैै। जिसके कारण मरीजों को बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है।
2,000 से अधिक ओपीडी में सिर्फ नौ नर्सिंग कर्मी स्टाफ उपलब्ध है। नर्सिंग स्टाफ की कमी से वर्तमान नर्सिंग कर्मियों पर बहुत ज्यादा भार पड़ रहा है। कई महीनों से चली आ रही स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की वजह से अस्पताल के हालात बहुत खराब है।

क्षेत्र में डेंगू बहुत तेजी से दस्तक दे चुका है और अस्पताल प्रबंधन बेबस और लाचार दिखाई दे रहा है।


मीडिया से बात करते हुए नर्सिंग कर्मियों की आंखों से दर्द छलक पड़ा। लेकिन दर्द को सुनने वाला और समझने वाला कोई नहीं।
नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि उप जिला अस्पताल में नर्सिंग कर्मियों की बहुत ज्यादा कमी है। जिसके चलते स्टाफ में मौजूद हम नौ ही कर्मचारियों पर सारा भार पड़ रहा है। जिसके कारण डॉक्टरों द्वारा हमारे साथ अभद्रता व गाली गलौज की जाती है। तो कभी मरीजों द्वारा हमारे साथ अभद्रता की जाती है लेकिन ना तो हमारी अधिकारी सुन रहे हैं और ना ही जनप्रतिनिधि। नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि सुबह 8:00 बजे से शुरू होने वाले अस्पताल की पर्चियां सुबह 6:00 बजे ही लगना शुरू हो जाती है। 2,000 से अधिक की ओपीडी सिर्फ 9 ही नर्सिंग कर्मचारियों को संभालनी पड़ रही है, जिसके कारण मानसिक तनाव और डिप्रेशन झेल रहे हैं। नर्सिंग कर्मियों का आरोप है कि डॉक्टर्स मरीज को निजी क्वार्टर पर देखते हैं और दवाइयां व ड्रिप लगवाने उप जिला अस्पताल में भेज देते हैं। जिसका भी एक्स्ट्रा भार हम पर पड़ रहा है और यह भी बताया कि हमारे बच्चे बीमार हो या हम खुद बीमार हो, तो हमें 1 दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती। दिन भर खुद दवाई ले-लेकर कर हमें ड्यूटी करनी पड़ती है। स्त्री रोग डिपार्टमेंट में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि रात के समय इमरजेंसी डिलीवरी वाले मरीज आते हैं। जो हमें खुद को ही देखने पड़ते हैं। रात के समय यहां कोई भी स्त्री रोग डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहता है। ज्यादा सीरियस मरीजों को जब अन्यत्र कहीं और रेफर करते हैं। तो परिजनों का दुर्व्यवहार झेलना पड़ता है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई हमारी मदद को तैयार नहीं उप जिला अस्पताल के वर्तमान हालात हो देखकर हमें काम छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उप जिला अस्पताल के उच्चाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से कर्मचारियों ने आग्रह किया है कि जल्द से जल्द स्टाफ की कमी को दूर कर हमारे साथ हो रहे दुर्व्यवहार गाली गलौज व मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से हमें मुक्ति दिलाई जाए। नहीं तो मजबूरन हमें अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन या हड़ताल का सहारा लेना पड़ेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here