जूतम-पैजार की पॉलिटिक्स राजस्थान में शुरू : जल्दी फूटेगा पाप का घड़ा

रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख


जयपुर : अपने राजस्थान में एक कहावत बड़ी जोरदार है― “हाथी से हाथी लड़े हुआ झाड़ियों का नाश” जी हाँ, यह कहावत राजस्थान में सटीक बैठ रही है। अशोक गहलोत और पायलट सचिन पायलट की लड़ाई जगजाहिर है। लेकिन उस लड़ाई में अशोक चांदना पर जूते फेंकना या उनको जूते दिखाना बेतुकी लड़ाई है। ऊपर से राजेंद्र राठौड़ साहब ने यह कहकर आग में घी डालने का काम किया है – आगे-आगे देखो क्या-क्या होता है अर्थात लड़ाई का बिगुल बजने वाला है जो कभी भी बजे सकता है। लेकिन देखना यह होगा कि इन सफेद हाथियों की लड़ाई में जनता का कितना भला और कितना बुरा होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल, इन सफेद हाथियों की लड़ाई से जनता के मन में विकास को लेकर डर बैठ गया।


गौरतलब है कि अजमेर में हुए जूतम-पैजार के बाद गुर्जर समाज के लोगों ने राजस्थान सरकार के मंत्री अशोक चांदना और शकुंतला रावत के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की।


मामला इतना बढ़ गया कि मंत्री अशोक चांदना को मंच पर जूते दिखाए गए। उन्हें घेरने के लिए भी लोग दौड़े हालात बिगड़ने पर चांदना और शकुंतला रावत को कड़ी सुरक्षा के बीच वहाँ से निकलना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम से नाराज़ अशोक चांदना ने ट्वीट कर लिखा कि मुझ पर जूता फ़िंकवाकर सचिन पायलट CM बने तो जल्दी बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया, फिर एक ही बचेगा और ये मैं चाहता नहीं हूं।
यदि इन शब्दों का अर्थ निकाला जाए तो मोटे तौर पर खून खच्चर की राजनीति शुरू होने वाली है।
इतना ही नहीं, आग में घी डालने का काम राजेंद्र राठौड़ ने भी किया। मंच पर राजेंद्र राठौड़ की जय जय कार और भव्य स्वागत को देखते हुए अजमेर में गुर्जर समाज की सम्मेलन का कई सियासी मायने निकल रहे हैं क्योंकि राजेंद्र राठौड़ ने ट्विटर पर लिखा – “दूसरों पर तोहमत लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांक लो। ये हालात क्यों बने हैं, दूसरों की पकी फ़सल काटकर अपने खेत पर ले जाओगे तो परिणाम यही होंगे। आगे आगे देखें होता है क्या?
राजेंद्र राठौड़ के ट्विटर से यह बात साफ जाहिर होती है कि राजनीति की फसल को काटने यदि कोई दूसरा आएगा, तो अंजाम तो भुगतान ही पड़ेगा।


इशारों ही इशारों में राजेंद्र राठौड़ अपने टि्वटर के माध्यम से यह बताना चाहते हैं की सचिन पायलट की बदौलत राजस्थान प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई है, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा अशोक गहलोत ने कर लिया। इसलिए जूतम-पैजार की राजनीति शुरू हुई।
सत्ता पर काबिज अशोक गहलोत हो गये। इसलिए उन्होंने यह बात बताई थी ट्रेनें आगे आगे देखो होता क्या क्या है।

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