मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, शीघ्र हो कार्रवाई अन्यथा देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। न्यायिक कर्मचारियों संगठनों की मांगे नहीं जाने पर आंदोलन तेज होने की संभावना बनी हुई है।
गौरतलब है कि शनिवार को ऑल इंडिया सबोर्डिनेट कोर्ट्स स्टाफ एसोसिएशन ने राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के मुख्य न्यायाधीश को पत्र के माध्यम से न्यायिक अधिकारी के निवास पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्व. श्री सुभाष मेहरा की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु के संबंध में दोषी व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने एवं उचित वैधानिक कार्यवाही किये जाने मांग की थी।
पत्र के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश का ध्यान जयपुर न्यायालय में पदस्थ एक न्यायिक अधिकारी के आवास पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्व. श्री सुभाष मेहरा की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु की जांच एवं दोषी व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने तथा समुचित वैधानिक कार्यवाही किये जाने की मांग को लेकर राजस्थान में प्रदेशभर के न्यायिक कर्मचारीगण द्वारा आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन समुचित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का प्रभाव संपूर्ण देश के न्यायिक कर्मचारियों में राष्ट्रीयस्तर पर फैल रहा है। इसलिए उक्त घटना से राजस्थान ही नहीं संपूर्ण देशभर के कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है और यह आंदोलन अन्य प्रांतों में भी फैलने की संभावना है।

शनिवार को ऑल इंडिया सबोर्डिनेट कोर्ट्स स्टाफ एसोसिएशन ने राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के मुख्य न्यायाधीश को दिया गया पत्र


पत्र के माध्यम से इस बात का आगाह किया गया कि उचित कार्रवाई हेतु प्रथम सूचना रिपोर्ट 07 दिसंबर 2022 से आवश्यक रुप से दर्ज किये जाने हेतु संबंधित को निर्देश जारी अन्यथा मजबूरीवश न्यायिक कर्मचारीगण को राष्ट्रव्यापी आंदोलन हेतु मजबूर होना पड़ेगा।
इतना ही नहीं, पत्र में न्यायालयों की गरिमा को दर्शाते हुए इस बात से अवगत कराया गया कि न्यायिक कर्मचारीगण भी आपके ही अधीनस्थ एवं न्यायपालिका के अधीन हैं और उन्हें ही न्यायपालिका से न्याय प्राप्त न हो पाये व आंदोलन हेतु मजबूर होना पड़े तो सामान्य जनता में भी न्यायपालिका की गरिमा के प्रतिकूल संदेश जावेगा। इसलिए यथाशीघ्र राजस्थान न्यायिक कर्मचारियों की मांगों का सम्यक् रुप से निराकरण किया जावे।
अब देखना होगा कि क्या राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के पत्र पर गौर फरमाते हैं या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल, न्यायिक कर्मचारियों के आंदोलन से राजस्थान प्रदेश में कम से कम 8 लाख केसों की सुनवाई बाधित हो रही है। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। यह यक्ष प्रश्न अपने उत्तर का इंतजार कर रहा है।

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