घाणी के बैल की तरह हो गई है पंचायत सहायकों की स्थिति :: सरकार नहीं ले रही है सुद

मीनेश चंद्र मीणा
हैलो सरकार न्यूज़ नेटवर्क


जयपुर : राजस्थान प्रदेश में कार्यरत लगभग 23700 पंचायत सहायकों की दशा और दिशा दोनों खराब चल रहे हैं।
पंचायत सहायक प्रवीण शर्मा ने बताया कि जिस तरह तेल निकालने के लिए घाणी का मालिक एक बैल की आंखों में पट्टी और मुंह में छींकी बांधता था, ताकि वह बैल न तो यह देख सके कि वह कहां चल रहा है और कितना चल रहा है। ताकि उसे यह भी अनुभव न हो कि बहुत ज्यादा दूरी तय करने के बाद भी वह वहीं का वहीं रहता है। इससे उसके मन में निराशा का भाव पैदा नहीं होता और अपने लगातार चलते जाने को वह अपनी नियति समझ बैठता है।


दूसरी ओर मुंह में छींकी बंधी होने से न तो वह उस घाणी से निकली खल का स्वाद चख सकता है चाहे वह कितना भी भूखा हो और न घाणी के तेल को पी सकता है ताकि उसे थोड़ी ताकत मिल सके।
सबकुछ उसके मालिक पर निर्भर करता है कि उसे वह खाने को क्या देगा, कितना देगा और कैसे देगा।
यह सब निर्णय उसके मालिक की दया और कृपा पर निर्भर करता है। चाहे वह बैल मरे या जिंदा रहे। मालिक को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
ठीक उसी प्रकार राजस्थान के पंचायत सहायकों के भी संविदा सेवा नियमों में शामिल करनी की पट्टी सरकार ने बांध दी है और मुंह में 21000/- मानदेय की छींकी बांध दी है जिसे पंचायत सहायक सरकारी कागज रूपी घाणी में देख तो सकता है लेकिन इसलिए नहीं खा सकता कि अभी उसके मालिकों ने यह नहीं सोचा है कि पंचायत सहायकों को क्या देना है, कैसे देना है और कब देना है। सबकुछ सरकार में बैठे मालिकों की दया, इच्छा और कृपा पर निर्भर है। अभी तो बस घाणी के बैल की तरह निरंतर अनभिज्ञ राह पर चलते जाना है।।
प्रवीण शर्मा, पंचायत सहायक की पोस्ट को देखकर प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि सरकार पंचायत सहायकों को नियमित करने के मूड में नहीं है। यदि समय रहते सरकार में पंचायत सहायकों को नियमित नहीं किया तो यह कहना गलत ना होगा की पंचायत सहायक हड़ताल या धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

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